अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब खत्म होने जा रहा है। दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ कहा जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि कतर ने पर्दे के पीछे से इस डील को सफल बनाने में मदद की। इस समझौते से पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लौटने की उम्मीद है।

इस समझौते की तैयारी 14 जून 2026 को शुरू हुई थी। 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर किए। इसके बाद 18 जून को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ के तौर पर इस पर साइन किए और यह समझौता तुरंत लागू हो गया। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया जाएगा।

समझौते की मुख्य बातें

यह एक 14 सूत्रीय ढांचा है जिसे 2026 के ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए बनाया गया है। इसके तहत मुख्य रूप से ये फैसले लिए गए हैं:

  • लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद कर दिए जाएंगे।
  • ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को फिर से खोलेगा।
  • अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की अपनी समुद्री नाकाबंदी हटाने का फैसला किया है।
  • अगले 60 दिनों तक ईरान कोई ट्रांजिट शुल्क नहीं लेगा।
  • ईरान के यूरेनियम भंडार और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर भविष्य में बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है।

कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता Majed bin Mohammed Al-Ansari ने कहा कि कतर पाकिस्तान के नेतृत्व में हो रही मध्यस्थता का पूरा समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि यह समझौता बातचीत के अगले चरण के लिए एक मजबूत आधार है और तकनीकी चर्चाएं स्विट्जरलैंड में होने की उम्मीद है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर इस डील को पूरा बताया और तुरंत Strait of Hormuz को खोलने और नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश दिया। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसे अमेरिकी जनता के लिए एक अच्छा सौदा बताया, जिसमें ईरान को प्रतिबंधों में राहत मिलेगी, बशर्ते वह आतंकवाद की फंडिंग और परमाणु हथियार बनाने का रास्ता छोड़ दे।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने इस शांति समझौते की सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की को इस डील में मदद करने के लिए धन्यवाद दिया। चीन और रूस ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। हालांकि, इस बीच 18 जून को दक्षिणी लेबनान में एक इजरायली ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है।