अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब खत्म होने वाली है। पाकिस्तान की मदद से दोनों देशों के बीच एक बड़ा शांति समझौता हुआ है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को ऐलान किया कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई है और अब युद्ध को रोकने की तैयारी है।

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प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर साइन करने की रस्म 19 जून को Switzerland में होगी। उन्होंने साफ किया कि दोनों देशों ने अपनी सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला किया है। इसमें Lebanon में चल रहे सैन्य अभियान भी शामिल हैं।

समझौते की मुख्य बातें

  • मध्यस्थ की भूमिका: इस पूरे सौदे में Pakistan ने मुख्य बिचौलिए का काम किया है। इसे डिप्लोमैटिक भाषा में ‘इस्लामाबाद डिक्लेरेशन’ कहा जा रहा है।
  • अन्य देशों की मदद: इस समझौते को करवाने में सऊदी अरब, कतर और तुर्की ने भी पाकिस्तान की मदद की है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: इस बड़े समझौते में इजराइल, UAE, बहरीन, जॉर्डन और मिस्र जैसे देश भी शामिल हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 13 जून को कहा था कि ईरान के साथ नया समझौता होने जा रहा है। उनका दावा था कि इस डील से ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा और Hormuz जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं चाहता है।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने थोड़ी सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रगति हुई है, लेकिन 14 जून को साइनिंग नहीं होगी। ईरान का कहना है कि अभी का मुख्य मकसद युद्ध को रोकना है, जबकि परमाणु मुद्दे पर बातचीत आगे के दौर में की जाएगी।

इसी बीच, UN के महासचिव ने बेरूत में इजराइली हमलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की उम्मीद थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सभी पक्षों से शांत रहने की अपील की है ताकि शांति प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।