अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही लड़ाई अब खत्म होने वाली है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने एक शांति समझौते पर सहमति जताई है। इस खबर के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है और व्यापारिक रास्तों के फिर से खुलने की बात कही गई है।
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शांति समझौते की मुख्य शर्तें
इस समझौते में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे और व्यापार सुचारू रूप से चल सके:
- युद्धविराम (सीजफायर) को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया गया है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा।
- अगले 30 दिनों के भीतर शिपिंग वॉल्यूम को युद्ध से पहले जैसा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से अपनी नाकाबंदी हटा लेगा।
- ईरान को 60 दिनों तक तेल बेचने के लिए कुछ प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी।
- समझौते में ईरान से परमाणु सामग्री को हटाने और नष्ट करने की शर्तें भी शामिल हैं।
नेताओं ने क्या कहा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 12 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो गया है। उन्होंने कहा कि शांति अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है और पाकिस्तान अब अगले कदमों के लिए दोनों पक्षों के साथ काम कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि जल्द ही इस समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस खबर को साझा किया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी मीडिया ने समझौते की शर्तों को गलत तरीके से पेश किया है। उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि आर्थिक लाभ तभी मिलेगा जब ईरान अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। उन्होंने किसी भी तरह के नकद भुगतान की खबरों को खारिज कर दिया।
हमले और तनाव का माहौल
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच भारी तनाव था। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में हमले किए, जिसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बंद करने का दावा किया था, जिससे पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई पर असर पड़ने का डर था। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को नकारा था, लेकिन इस विवाद की वजह से समुद्री यातायात काफी धीमा हो गया था।
इसराइल का रुख
इस समझौते पर इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह और राष्ट्रपति Trump इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि इसराइल की सैन्य कार्रवाइयों और सीजफायर के उल्लंघन की वजह से इस शांति समझौते में देरी हो रही थी।
