अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिससे दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने इस समझौते को एक बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम क्षेत्र की सुरक्षा और खुशहाली के लिए बहुत जरूरी था, लेकिन असली सफलता आने वाली तकनीकी बातचीत पर निर्भर करेगी।
इस समझौते को एक Memorandum of Understanding (MoU) के तौर पर देखा जा रहा है, जिस पर 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर किए। कतर के प्रधानमंत्री ने साफ किया कि यह सिर्फ शुरुआती कदम है और अब दोनों देशों के बीच विस्तार से चर्चा होनी जरूरी है। इसी मकसद से 21 जून 2026 को Switzerland में तकनीकी बातचीत शुरू हुई, जिसमें कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
समझौते की मुख्य बातें
इस समझौते के तहत कई अहम शर्तें तय की गई हैं, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सके:
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
- समुद्री नाकेबंदी: अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटा लेगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही को फिर से पहले जैसा करेगा ताकि व्यापार प्रभावित न हो।
- आर्थिक मदद: ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना बनाई जाएगी।
- तेल निर्यात: US Treasury Department ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तुरंत छूट (waivers) जारी करेगा।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम की स्थिति को बनाए रखेगा।
तनाव और चुनौतियां
समझौते के बावजूद माहौल पूरी तरह शांत नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत को ऐतिहासिक बताया है और कहा कि काफी प्रगति हुई है। हालांकि, राष्ट्रपति Donald Trump ने Truth Social पर एक चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने लेबनान में अपने समर्थित समूहों (proxies) पर लगाम नहीं लगाई, तो अमेरिका फिर से कड़ा प्रहार करेगा।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका और इसराइल पर आरोप लगाया है कि वे समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं क्योंकि इसराइली सेना अभी भी दक्षिणी लेबनान से बाहर नहीं निकली है। इस विवाद के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की बात कही है। इस बढ़ते तनाव के कारण स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के एजेंडे में लेबनान विवाद को भी शामिल किया गया है।
