अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब खत्म होने वाली है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति जताई है। इस बड़े काम में सऊदी अरब ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब का शुक्रिया अदा किया है।
समझौते की मुख्य बातें और तारीखें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 18 जून 2026 को सऊदी अरब के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे देशों के सहयोग से संभव हो पाया है। इस डील के बारे में कुछ खास जानकारियां नीचे दी गई हैं:
- 14 जून 2026: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा की।
- 16 जून 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति JD Vance, तथा ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने एक इलेक्ट्रॉनिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- 19 जून 2026: स्विट्जरलैंड में इस शांति समझौते का आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा।
क्षेत्रीय शांति और आर्थिक असर
इस समझौते के तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोला जाएगा और अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटा लेगा।
आर्थिक मोर्चे पर ईरान को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, 300 अरब डॉलर का एक आर्थिक विकास प्लान तैयार किया गया है, जिसमें अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साथी शामिल होंगे। हालांकि, यह फंड ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम में कटौती और परमाणु हथियारों का उत्पादन न करने की शर्त पर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने इस समझौते का स्वागत किया और पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और तुर्की की भूमिका की तारीफ की। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी इस कदम की सराहना की है।
वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी कैसे की जाएगी। दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने राष्ट्रपति ट्रम्प से कहा है कि इसराइल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा और वह खुद को इस डील के लेबनान वाले हिस्से से बाध्य नहीं मानता।
आगे क्या होगा
हस्ताक्षर समारोह के बाद 60 दिनों की बातचीत का समय तय किया गया है। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील और ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करने जैसे बचे हुए मुद्दों को सुलझाया जाएगा।