अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा शांति समझौता हुआ है, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को दोबारा खोल दिया गया है। इस फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है और तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस समझौते से भारत जैसे देशों के लिए व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति आसान हो जाएगी।

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इतिहास का सबसे बड़ा समझौता और भारत पर असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने 14 पॉइंट्स का एक समझौता (MoU) साइन किया है। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताही ने बताया कि Strait of Hormuz की सुरक्षा ईरान के लिए एक बुनियादी सिद्धांत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते से भारत को फिर से ईरान से तेल मिलना शुरू होगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते और मज़बूत होंगे।

राजदूत फताही ने यह भी याद दिलाया कि प्रतिबंधों से पहले ईरान, भारत को तेल सप्लाई करने वाले टॉप तीन देशों में शामिल था और दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 17 अरब डॉलर से ज़्यादा था।

समझौते की मुख्य बातें

इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी तुरंत हटा ली है और ईरान ने समुद्री रास्ते को फिर से खोल दिया है। अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उनके फ्रीज किए गए पैसे वापस करने का वादा किया है। साथ ही, ईरान को 300 अरब डॉलर का एक आर्थिक विकास प्रोग्राम भी दिया जाएगा।

मुख्य विवरण जानकारी
रास्ते की स्थिति 100 दिनों के बाद Strait of Hormuz दोबारा खुला
तेल का ट्रांजिट एक रात में 12.5 मिलियन बैरल तेल निकला
कुल उम्मीद 60 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल के निकलने की उम्मीद
टोल टैक्स 60 दिनों तक जहाजों के लिए रास्ता बिल्कुल मुफ्त
आर्थिक मदद ईरान को 300 अरब डॉलर का डेवलपमेंट प्रोग्राम
भारत-ईरान व्यापार प्रति वर्ष 17 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार था

सुरक्षा और भविष्य की योजना

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि इस शांति समझौते की वजह से समुद्री ट्रैफिक फिर से शुरू हो गया है और ऊर्जा बाजार स्थिर हुआ है। ईरान ने भी भरोसा दिलाया है कि वह कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और ऊर्जा का प्रवाह बिना किसी रुकावट के चालू रखेगा। भविष्य में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के भंडार की निगरानी IAEA करेगा। दोनों देशों ने तय किया है कि अगले 60 दिनों के भीतर एक फाइनल एग्रीमेंट पर बात पूरी कर ली जाएगी।