अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इस समझौते पर साइन किए हैं। अब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के Burgenstock रिजॉर्ट में मुलाकात करेंगे ताकि शांति समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।

समझौते की बड़ी बातें

इस समझौते में कुल 14 पॉइंट शामिल हैं, जो फिलहाल एक अंतरिम शांति डील की तरह काम करेगा। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों पर सहमति बनी है:

  • दोनों देशों के बीच युद्ध पूरी तरह रुक जाएगा, जिसमें लेबनान में चल रही लड़ाई भी शामिल है।
  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों के लिए फिर से खोल दिया गया है, जिससे व्यापार फिर से शुरू हो सके।
  • अमेरिका ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटा लेगा और ईरान के फ्रीज किए गए पैसों और प्रतिबंधों में ढील देगा।
  • ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में अपने यूरेनियम भंडार को कम करेगा।
  • अगर अंतिम समझौता सफल रहता है, तो ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की व्यवस्था की जाएगी।

अगले 60 दिनों का प्लान

इस समझौते के बाद अब 60 दिनों की एक समय सीमा तय की गई है। इस दौरान दोनों देश परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य जैसे बड़े मुद्दों पर विस्तार से बात करेंगे। स्विट्जरलैंड के विदेशी मंत्रालय ने बताया है कि अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि 19 जून से Burgenstock रिजॉर्ट में बातचीत शुरू करेंगे।

तनाव और चेतावनी

शांति समझौते के बावजूद कुछ मुद्दों पर अभी भी असहमति है। ईरान का कहना है कि लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी समझौते का उल्लंघन होगा, लेकिन इजरायल ने अपनी सेना हटाने से मना कर दिया है।

दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों को नहीं माना, तो अमेरिका फिर से नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर सकता है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस डील की पुष्टि की है, लेकिन क्योंकि साइन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो गए, इसलिए उन्होंने अपना स्विट्जरलैंड दौरा टाल दिया है।