अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर आने के बाद दुनिया भर में हलचल मची है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल से लदे जहाज़ अब बाहर निकलना शुरू हो गए हैं। यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव खत्म करने और क्षेत्र में शांति लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
स्विट्जरलैंड में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर
इस शांति समझौते के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार किया गया है, जिस पर शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर होंगे। इस मौके पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance भी शामिल हो सकते हैं। समझौते के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत चलेगी।
ट्रंप के दावे और जमीनी हकीकत
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि उन्होंने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को टोल-फ्री खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश दे दिया है। उन्होंने दुनिया भर के जहाजों से इंजन शुरू करने और तेल के प्रवाह को बहाल करने की अपील की।
हालांकि, इस दावे को लेकर कुछ अलग जानकारियां भी सामने आई हैं। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि 60 दिनों की बातचीत के बाद ट्रांजिट फीस ली जा सकती है। साथ ही, जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, सोमवार तक अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी लागू थी और शिपिंग डेटा के अनुसार केवल एक मालवाहक जहाज़ ही वहां से गुजरा है।
इन देशों और संस्थाओं की भूमिका
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस डील में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
- संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने इस समझौते का स्वागत किया है।
- इजराइल: इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते से बंधा नहीं है और लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा।
- अन्य सहयोगी: इस बातचीत में कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की ने भी सहयोग किया।
ईरानी डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबदी ने वाशिंगटन के साथ इस समझौते की पुष्टि की है। यह डील फरवरी में शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों और ईरान के बीच के युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।