अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा शांति समझौता हुआ है जिससे युद्ध खत्म होने की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ़ कहा है कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इस समझौते के बाद Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
समझौते की मुख्य बातें
दोनों देशों के बीच एक Memorandum of Understanding (MOU) तैयार किया गया है। इसके तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद कर दिए जाएंगे। इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर 19 जून 2026 को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
- परमाणु हथियार: Donald Trump ने बताया कि ईरान इस शर्त पर सहमत हो गया है कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।
- कड़ी निगरानी: इस डील को सही तरीके से लागू करने के लिए “strong policing” का इस्तेमाल किया जाएगा।
- समुद्री रास्ता: अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटा ली गई है और तेल से लदे जहाज Strait of Hormuz से गुजरना शुरू कर रहे हैं।
- बातचीत का समय: परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों पर चर्चा के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है।
दुनिया भर की प्रतिक्रियाएं
संयुक्त राष्ट्र के Secretary-General Antonio Guterres ने इसे मध्य पूर्व में शांति की ओर एक बड़ा कदम बताया है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने भी समुद्री रास्ता खोलने का स्वागत किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है और कतर ने भी दोनों देशों की कोशिशों की तारीफ की है।
दूसरी तरफ, इसराइल ने इस समझौते का विरोध किया है। इसराइल का कहना है कि वह इस डील से नहीं बंधा है और लेबनान से अपनी सेना वापस नहीं लेगा। इसराइल ने साफ़ किया कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा ताकि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।
फंड्स को लेकर अलग-अलग दावे
पैसों के लेन-देन को लेकर अभी कुछ विवाद है। ईरान की Revolutionary Guard का कहना है कि उन्हें लगभग 24 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए फंड्स का आधा हिस्सा बातचीत से पहले मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान पूरी तरह शर्तों को नहीं मानता, तब तक कोई पैसा जारी नहीं किया जाएगा।