अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से चल रहे युद्ध को खत्म करने की तैयारी चल रही है। राष्ट्रपति Trump ने एक बड़े समझौते का संकेत दिया है, लेकिन दोनों देशों के बीच समय को लेकर अभी भी खींचतान जारी है। एक तरफ पाकिस्तान इसे 24 घंटे में होने वाला बता रहा है, तो वहीं ईरान इसे कुछ दिनों बाद की बात कह रहा है।
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समझौते की समय सीमा पर विवाद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अगले 24 घंटों में होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस समझौते के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की तैयारी कर रहा है। हालांकि, ईरान ने 24 घंटे वाली बात को खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वे आने वाले दिनों में शांति समझौते के ढांचे पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन यह काम इस रविवार को नहीं होगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी संकेत दिया कि वाशिंगटन आने वाले दिनों में एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद कर रहा है। राष्ट्रपति Trump ने प्रधानमंत्री शरीफ के ट्वीट को repost किया है, जिससे उनके नरम रुख का पता चलता है।
इन मुद्दों पर फंसा है पेंच
भले ही बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन कुछ मुख्य बातों पर दोनों देशों की राय अलग है:
- परमाणु कार्यक्रम: समझौते के बाद 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करे, जबकि ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार को बनाए रखना चाहता है।
- प्रतिबंध और संपत्ति: अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और जमी हुई संपत्ति वापस करने पर विचार कर रहा है, लेकिन उसने साफ कहा है कि पैसा तभी मिलेगा जब ईरान शर्तों को पूरा करेगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री रास्ता फिर से खुले, जबकि ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस लेने का प्रस्ताव रखा है।
युद्ध के बीच ड्रोन हमले जारी
डिप्लोमेसी के साथ-साथ मैदान में तनाव भी बना हुआ है। US Central Command ने पुष्टि की है कि 12 और 13 जून को ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए कई ड्रोन दागे। अमेरिकी सेना ने इन सभी ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया।
इसराइल का रुख
इस पूरे समझौते से इसराइल ने खुद को अलग रखा है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कर दिया है कि इसराइल इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा। उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में हिजबुल्लाह की गतिविधियों को लेकर काफी चिंता है।