अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब खत्म हो सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक शांति समझौते पर डिजिटल साइन किए हैं। इस खबर से पूरी दुनिया में राहत है क्योंकि इससे व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल गया है।

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समझौते की मुख्य बातें

यह समझौता 14 जून से 17 जून 2026 के बीच हुआ। व्हाइट हाउस और ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने इसकी पुष्टि की है। 19 जून को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में इसका औपचारिक समारोह आयोजित किया जाएगा। इससे पहले 16 जून को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद-बागर गालिबाफ ने भी इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते की शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई है, जिसका विवरण नीचे टेबल में दिया गया है:

शर्त विवरण
सैन्य अभियान लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध तुरंत और स्थायी रूप से बंद होगा
तेल निर्यात ईरान तुरंत तेल निर्यात करना शुरू कर सकेगा
होर्मुज जलडमरूमध्य 60 दिनों तक जहाजों का रास्ता मुफ्त रहेगा
अमेरिकी नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह खत्म होगी
सैन्य वापसी अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका अपनी सेना हटा लेगा
परमाणु कार्यक्रम प्रतिबंध हटाने के बदले ईरान को यूरेनियम का स्टॉक नष्ट करना होगा
अंतिम समझौता अगले 60 दिनों के भीतर पूरी डील पर बातचीत पूरी होगी

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

G7 देशों ने इस फैसले को एक बड़ी कामयाबी और ऐतिहासिक अवसर बताया है। इस पूरी बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने बताया कि इस समझौते में राष्ट्रीय हितों का पूरा ध्यान रखा गया है और IRGC ने भी इस टेक्स्ट का समर्थन किया है।

दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की कोशिश जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इसराइल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा, हालांकि समझौता लेबनान में सैन्य अभियान खत्म करने की बात करता है।