अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक बार फिर बातचीत शुरू हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उम्मीद है कि यह डील जल्द हो जाएगी और जंग खत्म हो जाएगी, लेकिन ईरान के आम लोग इस बात को लेकर काफी उलझन में हैं। सालों से चली आ रही नाकाम कोशिशों और देश की खराब आर्थिक हालत ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है।
अमेरिका के शांति प्रस्ताव में क्या खास बातें हैं?
खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक पेज का प्रस्ताव भेजा है। इस डील का मुख्य मकसद युद्ध को आधिकारिक तौर पर खत्म करना है। इसके बाद कुछ अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, जैसे:
- अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य करना।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना, जिसमें भविष्य में यूरेनियम बढ़ाने पर रोक की बात कही गई है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार के प्रस्ताव में मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी मिलिशिया जैसे पुराने विवादित मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है।
ईरान की सरकार और जनता की क्या प्रतिक्रिया है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने पुष्टि की है कि उनकी सरकार अमेरिका के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है। ईरान अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजेगा, क्योंकि पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
वहीं, स्वतंत्र पत्रकार Sarah Odeima ने बताया कि ईरान की जनता इस डील को लेकर बहुत शकी है। लोग पुराने अनुभवों और महंगाई की वजह से इसे आसानी से स्वीकार नहीं कर रहे हैं। फिलहाल आम लोग ‘इंतजार करो और देखो’ वाली स्थिति में हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प और इसराइल का इस पर क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस बातचीत को बहुत अच्छा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान शर्तों को मान लेता है तो युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो सकता है और डील होना पूरी तरह संभव है।
दूसरी ओर, इसराइल के सूत्रों का कहना है कि उन्हें इस संभावित डील की जानकारी नहीं थी। इसराइल इस समय युद्ध के और बढ़ने की आशंका जता रहा है और अपनी तैयारियां कर रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और अमेरिका के बीच किस तरह की डील की बात चल रही है?
दोनों देश युद्ध खत्म करने के लिए 14 बिंदुओं वाले एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना और परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना शामिल है।
ईरानी जनता इस डील पर भरोसा क्यों नहीं कर रही है?
सालों से चली आ रही नाकाम बातचीत और देश की खराब आर्थिक स्थिति के कारण आम जनता को लगता है कि यह प्रयास भी विफल हो सकता है।