US और Iran के बीच शांति के लिए पाकिस्तान-मिस्र का बड़ा प्लान, बन सकता है नया इस्लामिक सुरक्षा गठबंधन

मिस्र और पाकिस्तान मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने की कोशिश कर रहे हैं। इस बड़े मिशन में सऊदी अरब और तुर्की भी शामिल हैं। इसका मुख्य मकसद खाड़ी देशों की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई को सुरक्षित रखना है ताकि युद्ध की नौबत न आए और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

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अमेरिका और ईरान की बातचीत में क्या हुआ?

अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान की टीमें इस्लामाबाद पहुंची थीं। दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक लंबी चर्चा हुई, लेकिन कोई पूरा समझौता नहीं हो पाया। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान यूरेनियम भंडार सौंपने को तैयार है, लेकिन ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव को गलत और अनुचित बताते हुए उसे खारिज कर दिया है।

क्या है नया इस्लामिक सुरक्षा गठबंधन?

सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर काम कर रहे हैं जिसे ‘इस्लामिक क्वाड’ या ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। इन देशों के विदेश मंत्री अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम में मिले हैं। इनका मकसद बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम करना और क्षेत्रीय संकटों, जैसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, पर मिलकर अपनी प्रतिक्रिया तय करना है।

तारीख (2026) घटना
6 अप्रैल ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को नकारा और 10-सूत्रीय जवाब दिया
8 अप्रैल पाकिस्तान की मदद से अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमत हुए
11 अप्रैल दोनों देशों की टीमें शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचीं
12 अप्रैल 21 घंटे की बातचीत के बाद भी कोई पूर्ण समझौता नहीं हो सका
14 अप्रैल इस्लामाबाद में ‘इस्लामिक क्वाड’ बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई
15 अप्रैल डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान युद्ध समाप्त करने की कगार पर है
17 अप्रैल ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज किया और अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की