अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर जो दो हफ्ते का सीज़फायर हुआ था, वह अब खतरे में दिख रहा है. दोनों देशों ने शांति के लिए अलग-अलग प्रस्ताव रखे हैं, लेकिन उनमें इतनी उलझन है कि समझ नहीं आ रहा असली प्लान क्या है. इस खींचतान का असर अब सीधा युद्ध के मैदान और समुद्री रास्तों पर दिख रहा है.

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अमेरिका और ईरान के शांति प्रस्तावों में क्या अंतर है?

अमेरिका ने 15 पॉइंट का एक फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसमें ईरान से यूरेनियम बनाना बंद करने और लड़ाकों की मदद रोकने को कहा गया है. इसके जवाब में ईरान ने 10 पॉइंट का प्रस्ताव रखा है. ईरान की मांग है कि अमेरिका उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा ले, युद्ध के नुकसान का पैसा दे और अपने सैनिकों को इस इलाके से पूरी तरह बाहर निकाले.

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद इस बात पर है कि क्या यह सीज़फायर लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई पर भी लागू होता है. ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि यह लागू होता है, लेकिन अमेरिका और इसराइल इससे इनकार कर रहे हैं.

शांति प्रस्तावों को लेकर इतनी उलझन क्यों है?

उलझन तब बढ़ी जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 10 पॉइंट वाले प्लान को बातचीत का सही आधार बताया. लेकिन बाद में व्हाइट हाउस के अधिकारियों और उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि जो प्लान पब्लिक में आया है, वह वह नहीं है जिसे ट्रंप ने स्वीकार किया था. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सिर्फ एक ही ऐसा ग्रुप है जिसके पॉइंट्स अमेरिका को मंजूर हैं और इस पर गुप्त बातचीत होगी.

इसी बीच, ईरान के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इसराइल ने समझौते की शर्तों को तोड़ा है. उन्होंने लेबनान में बढ़ते हमलों और यूरेनियम कार्यक्रम पर असहमति को इसका कारण बताया है.

ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने अपनी मांगों को लेकर जो 10 पॉइंट का प्रस्ताव दिया है, उसकी मुख्य बातें नीचे दी गई तालिका में हैं:

ईरान की प्रमुख मांगें विवरण
सुरक्षा की गारंटी अमेरिका ईरान पर दोबारा हमला नहीं करेगा
समुद्री नियंत्रण Strait of Hormuz पर ईरान का कंट्रोल रहेगा
परमाणु अधिकार यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार मिले
प्रतिबंधों की समाप्ति सभी प्राइमरी और सेकेंडरी सैंक्शंस हटें
अंतरराष्ट्रीय फैसले UN और IAEA के सभी प्रस्ताव खत्म हों
मुआवजा युद्ध से हुए नुकसान का पैसा मिले
सैनिकों की वापसी अमेरिका अपनी सेना इलाके से हटाए
युद्ध बंदी लेबनान और हिज़बुल्लाह समेत सभी मोर्चों पर युद्ध रुके

अब सबकी नज़रें शनिवार, 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत पर हैं. अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance और स्टीव विटकॉफ की टीम इस बातचीत का नेतृत्व करेगी.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com