अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस खींचतान के बीच अब दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहे पाकिस्तान की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को क्यों नकारा?

12 मई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के ताज़ा शांति प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया और इसे ‘कूड़ा’ करार दिया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्धविराम अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि उनके प्रस्ताव जायज़ थे और ईरान सिर्फ अपने अधिकारों की मांग कर रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्यों उठा विवाद?

ट्रंप के करीबी Senator Lindsey Graham ने पाकिस्तान की भूमिका पर शक जताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, ईरान के रुख को असलियत से ज़्यादा बेहतर और सकारात्मक बनाकर अमेरिका के सामने पेश कर रहा है। ग्राहम ने यह भी कहा कि अगर यह खबर सही निकली कि पाकिस्तान गुप्त रूप से ईरान की सैन्य संपत्ति को जगह दे रहा है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर पूरी तरह से दोबारा विचार करना होगा।

ईरान और अमेरिका के बीच अब तक क्या हुआ?

  • 11 मई 2026 को ईरान ने अपने प्रस्ताव को ‘उचित और उदार’ बताया और कहा कि वह परमाणु कार्यक्रम से ज़्यादा युद्ध खत्म करने को महत्व दे रहा है।
  • ईरान ने पुष्टि की कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर मध्यस्थ बना हुआ है, हालांकि कतर जैसे अन्य देश भी संपर्क में हैं।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने 9 मई 2026 को अपना जवाब पाकिस्तान को सौंपा था ताकि उसे वॉशिंगटन भेजा जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर क्या विवाद हुआ?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे बेकार बताया, जबकि ईरान इसे उचित और उदार मान रहा है।

पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिका ने क्या सवाल उठाए हैं?

अमेरिकी Senator Lindsey Graham ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान, ईरान की स्थिति को ज़रूरत से ज़्यादा सकारात्मक बता रहा है और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।