अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. ईरान ने अमेरिका के नए शांति प्रस्ताव की समीक्षा शुरू कर दी है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ़ कहा है कि उन्हें ईरान से सही जवाब चाहिए, वरना सैन्य कार्रवाई का खतरा बना रहेगा.

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का क्या है मामला?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 21 मई 2026 को बताया कि उन्हें अमेरिका के विचार मिल गए हैं और वे उनकी जांच कर रहे हैं. यह पूरा प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा गया है, जिसमें पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsen Naqvi ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. इससे पहले ईरान ने एक 14 पॉइंट का प्लान भेजा था, जिस पर अमेरिका ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

शांति समझौते के लिए दोनों देशों की क्या मांगें हैं?

दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर काफी खींचतान चल रही है. मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • Donald Trump का कहना है कि समझौता तभी होगा जब ईरान 100 प्रतिशत सही जवाब देगा. उन्होंने साफ़ किया कि वे किसी छोटे या सीमित समझौते के मूड में नहीं हैं.
  • ईरान की मांग है कि विदेश में जमा उसके पैसे (Frozen Assets) वापस किए जाएं और उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म की जाए.
  • ईरान ने अमेरिका की शर्तों को नाज़ायज़ बताया है.

युद्ध का खतरा और मौजूदा स्थिति क्या है?

हालाँकि 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था, लेकिन Strait of Hormuz के पास दोनों देशों की नौसेना के बीच झड़पें जारी रहीं. ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो युद्ध पूरे इलाके में फैल जाएगा. दूसरी तरफ, इसराइल की सेना के प्रमुख Eyal Zamir ने बताया कि उनकी सेना हाई अलर्ट पर है. ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं ताकि मामला और न बिगड़े.

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कौन मध्यस्थता कर रहा है?

पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsen Naqvi ने संदेशों के आदान-प्रदान के लिए तेहरान का दौरा किया है.

ईरान की मुख्य मांगें क्या हैं?

ईरान चाहता है कि विदेश में जमा उसकी संपत्ति वापस मिले और अमेरिकी सेना द्वारा उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी को खत्म किया जाए.