ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में कुछ बड़ी मुश्किलें सामने आ रही हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि बातचीत का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन अमेरिका के बदलते रुख की वजह से अभी समझौता होना मुश्किल है। इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौता करीब-करीब तय है, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे समझौते के लिए कोई जल्दबाजी न करें और जब तक समझौता नहीं होता तब तक समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी।
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ईरान ने अमेरिका पर लगाया बातचीत में रुकावट डालने का आरोप
ईरानी मीडिया और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका समझौते के कुछ हिस्सों में बाधा डाल रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 25 मई 2026 को बयान दिया कि बातचीत के काफी मुद्दे सुलझ चुके हैं, लेकिन समझौता तुरंत होने की उम्मीद नहीं है। ईरान का मुख्य मुद्दा विदेशों में फंसे उसके पैसों को वापस पाना है। ईरान का कहना है कि इन पैसों को जारी करना समझौते की पहली शर्त होनी चाहिए और इसे परमाणु मुद्दे से अलग रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, ईरान को इस बात की कोई गारंटी नहीं दिख रही है कि अमेरिका भविष्य में इस समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो का क्या है कहना?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन आखिरी बारीकियों पर अभी भी काम चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि समय हमारे पक्ष में है और इस समझौते के लिए किसी तरह की हड़बड़ी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जब तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी जारी रहेगी। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने का एक ठोस प्रस्ताव मेज पर है, लेकिन अगर कूटनीति काम नहीं आई तो अमेरिका दूसरा रास्ता भी अपना सकता है।
समझौते में क्या-क्या शर्तें शामिल हैं और कहां आ रही है दिक्कत?
प्रस्तावित समझौते के तहत 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान सैद्धांतिक रूप से अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को हटाने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, ईरान चाहता है कि इस समझौते से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर चल रहा युद्ध समाप्त हो, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई का समर्थन करता है। इस प्रस्तावित समझौते में ईरान के मिसाइल भंडार को लेकर कोई बात नहीं की गई है, जिससे बातचीत आगे बढ़ने में मुश्किलें आ रही हैं। इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में सबसे बड़ा विवाद क्या है?
सबसे बड़ा विवाद ईरान के फ्रीज किए गए फंड को वापस पाने को लेकर है। ईरान चाहता है कि उसके पैसे तुरंत जारी किए जाएं और इसे परमाणु मुद्दे से न जोड़ा जाए, जबकि अमेरिका कुछ अन्य मुद्दों पर अड़ा हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस समझौते पर क्या रुख है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि समझौता लगभग तय हो चुका है, लेकिन बातचीत में जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि जब तक समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी बनी रहेगी।