अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें नाकाम हो गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। इस खबर के आते ही कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई। तनाव इतना बढ़ गया है कि अमेरिकी नौसेना ने समुद्र में ईरानी माइन हटाने का अभियान शुरू कर दिया है।
शांति वार्ता क्यों फेल हुई और ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान जाने वाले अपने दूतों का दौरा रद्द कर दिया। ट्रंप ने कहा कि इन बातचीत में बहुत ज्यादा समय और पैसा खर्च हो रहा था और ईरान की तरफ से आया शांति प्रस्ताव पर्याप्त नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के नेतृत्व में काफी भ्रम और आंतरिक झगड़े चल रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका के पास पूरी ताकत है और अगर ईरान बात करना चाहता है तो उसे खुद संपर्क करना चाहिए। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ईरान की तरफ से कुछ प्रगति दिखी थी लेकिन मामला अभी सुलझा नहीं है।
ईरान का क्या जवाब है और उसकी रणनीति क्या है?
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को साफ कर दिया कि वे दबाव या नाकेबंदी के बीच किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होंगे। ईरान की मांग है कि पहले अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाए। वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने टेलीग्राम पर कहा कि Strait of Hormuz पर नियंत्रण रखना उनकी एक पक्की रणनीति है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस्लामाबाद से रूस रवाना हो गए हैं जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे।
तेल की कीमतों और क्षेत्रीय तनाव पर क्या असर हुआ?
बातचीत टूटने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है, जो दुनिया भर के लिए चिंता का विषय है। एक्सपर्ट Jorge Montepeque के मुताबिक बाजार अभी इस जोखिम को पूरी तरह नहीं समझ पाया है कि अगर Strait of Hormuz में नाकेबंदी बढ़ी तो क्या होगा। दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले के आदेश दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।