अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही लड़ाई खत्म होने वाली है। दोनों देश एक शांति समझौते के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, ईरान के भीतर इस डील को लेकर भारी विरोध हो रहा है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस बातचीत का मुख्य मुद्दा Strait of Hormuz का रास्ता और परमाणु कार्यक्रम है।

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क्या है इस समझौते की बड़ी शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि इस डील से यह पक्का हो जाएगा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा और समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खुल जाएगा। इस समझौते में कई अहम शर्तें शामिल हैं:

  • ईरान को 30 दिनों के भीतर Strait of Hormuz से सभी माइन (mines) हटानी होंगी।
  • ईरान इस समुद्री रास्ते पर कोई टोल टैक्स नहीं वसूल सकेगा।
  • अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) हटा लेगा।
  • समझौते के 60 दिनों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
  • अगर ईरान परमाणु साइट्स बंद करता है और हिजबुल्लाह जैसे समूहों की फंडिंग रोकता है, तो उसे प्रतिबंधों में बड़ी राहत मिल सकती है।

ईरान में क्यों हो रहा है जोरदार विरोध

इस शांति समझौते की खबरों के बाद ईरान के मशाद (Mashhad) और तेहरान में कट्टरपंथी समूहों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी विदेश मंत्री Abbas Araghchi और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि अरगची ने अमेरिका के सामने बहुत ज्यादा झुकने का काम किया है और देश के रणनीतिक हितों के साथ समझौता किया है। कट्टरपंथी सांसद Seyed Mahmoud Nabavian ने इस डील को ईरान के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है।

तनाव और ताजा अपडेट

बातचीत के बीच तनाव भी देखने को मिला। शनिवार को अमेरिका ने Strait of Hormuz में ईरान के कई अटैक ड्रोन मार गिराए, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी संकेत दिया था कि समझौता अगले 24 घंटों में हो सकता है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने बाद में साफ किया कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना कम है।

अगले कदम और भविष्य की योजना

अगर यह समझौता इस सप्ताहांत पूरा हो जाता है, तो अगले हफ्ते से तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनके फंसे हुए पैसों की वापसी इस समझौते का एक अहम हिस्सा होगी। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान में मौजूद परमाणु कचरे को हटाने और उसे नष्ट करने का काम भी करेगा।