अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशों को लेकर अब खींचतान शुरू हो गई है। शुक्रवार को दोनों देशों ने शांति वार्ता की स्थिति पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बातें कही हैं। जबकि अमेरिका का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत होगी, वहीं ईरान ने इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह पूरा मामला पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही कूटनीतिक हलचलों से जुड़ा है।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर क्या विवाद हुआ?

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने जानकारी दी कि अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शनिवार, 26 अप्रैल को पाकिस्तान जाएंगे। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने खुद इस आमने-सामने की मुलाकात की मांग की थी। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmael Baqaei ने सोशल मीडिया पर साफ कह दिया कि अमेरिका के साथ उनकी कोई सीधी बैठक तय नहीं है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के अधिकारी ही दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करेंगे।

पाकिस्तान की भूमिका और जमीनी तनाव की क्या स्थिति है?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शुक्रवार को आधिकारिक दौरे पर इस्लामाबाद पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात पाकिस्तानी विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar, आर्मी चीफ Asim Munir और आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi से हुई। दूसरी तरफ सैन्य तनाव भी बढ़ रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने Strait of Hormuz में माइन बिछाए तो अमेरिकी सेना उन्हें नष्ट कर देगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी अब और सख्त की जा रही है।

आर्थिक दबाव और तेल शिपमेंट पर अमेरिका का क्या फैसला है?

अमेरिका अब ईरान पर आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ाने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने पुष्टि की कि ईरान के तेल शिपमेंट के लिए दी जाने वाली एक बार की छूट (waiver) को अब रिन्यू नहीं किया जाएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान एक गंभीर डील के लिए तैयार हो। इससे पहले अप्रैल की शुरुआत में इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी, क्योंकि ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होने तक प्रतिनिधिमंडल भेजने से मना कर दिया था।