अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब बातचीत के जरिए सुलझने की कोशिश की जा रही है। 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधी मुलाकात शुरू हुई। इस बैठक से पहले 8 अप्रैल को दो हफ्ते का एक छोटा युद्धविराम लागू किया गया था ताकि शांति वार्ता हो सके।

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दोनों देशों ने क्या शर्तें रखीं?

शांति समझौते के लिए अमेरिका और ईरान ने अपने-अपने प्रस्ताव पेश किए हैं, जिनमें काफी अंतर देखा जा रहा है। दोनों पक्षों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

पक्ष मुख्य मांगें
ईरान (10-सूत्रीय योजना) युद्ध का पूरी तरह अंत, भविष्य में हमलों पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण।
अमेरिका (15-सूत्रीय योजना) ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना।

बातचीत में कौन शामिल है और क्या है तनाव?

इस उच्च स्तरीय वार्ता में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शामिल हुए। वहीं ईरान की तरफ से संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख ने इस बैठक की मेजबानी की।

तनाव इस बात का है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कहा था कि ईरान के साथ कोई समझौता बिना शर्त आत्मसमर्पण के नहीं होगा। साथ ही उन्होंने 11 अप्रैल को दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को “साफ़ करने” की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि वे गहरे अविश्वास के साथ इस बातचीत में आए हैं।

युद्धविराम को लेकर क्या है विवाद?

दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम तय हुआ था, लेकिन इसके दायरे को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। ईरान और पाकिस्तानी मध्यस्थों का कहना है कि इस युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है। दूसरी तरफ, इसराइल ने इसे मानने से इनकार कर दिया और लेबनान में हिज़बुल्लाह पर अपने हमले जारी रखे। ईरान इस कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन मानता है।