US-Iran Peace Talks: लेबनॉन में शांति जरूरी, पाकिस्तान ने बिछाई बातचीत की जमीन, ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान
अमेरिका और ईरान के बीच शांति बातचीत को लेकर एक बड़ा मोड़ आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगर लेबनॉन में शांति नहीं होगी, तो बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दशकों बाद इजराइल और लेबनॉन के नेताओं के बीच बातचीत कराने का ऐलान किया है ताकि दोनों देशों के बीच तनाव को कम किया जा सके।
शांति बातचीत में पाकिस्तान और अन्य देशों की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif सऊदी अरब और कतर के दौरों पर हैं ताकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता हो सके। साथ ही, पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मिल रहे हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके। पाकिस्तान का मानना है कि लेबनॉन को भी युद्धविराम के दायरे में लाना बहुत जरूरी है।
लेबनॉन और इजराइल के बीच अब क्या होगा?
राष्ट्रपति Trump ने 16 अप्रैल 2026 को इजराइल और लेबनॉन के नेताओं के बीच पहली बार बातचीत की योजना बताई है। हालांकि, लेबनॉन के राष्ट्रपति Joseph Aoun का कहना है कि जब तक इजराइल अपनी सेना वापस नहीं लेता, तब तक सीधी बातचीत नहीं होगी। दूसरी ओर, इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि लेबनॉन और Hezbollah इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने दक्षिणी लेबनॉन में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है।
विभिन्न देशों और नेताओं का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
| पक्ष/नेता | मुख्य बयान और स्थिति |
|---|---|
| पाकिस्तान विदेश मंत्रालय | लेबनॉन में शांति के बिना शांति वार्ता संभव नहीं है। |
| ईरान (मोहम्मद बागेर कालिबाफ) | लेबनॉन में युद्धविराम उतना ही जरूरी है जितना ईरान के लिए। |
| लेबनॉन (जोसेफ औन) | इजराइली सेना की वापसी सीधी बातचीत के लिए पहला कदम होगा। |
| अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप) | इजराइल और लेबनॉन के बीच दशकों बाद बातचीत कराने की योजना है। |
| अमेरिका (JD वेंस) | लेबनॉन कभी भी अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं था। |
| इजराइल (बेंजामिन नेतन्याहू) | लेबनॉन और हिजबुल्लाह युद्धविराम के दायरे में नहीं आते। |
| व्हाइट हाउस | बातचीत जारी है और अगली बैठक इस्लामाबाद में हो सकती है। |