अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें कम होती दिख रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। निवेशक इस बात को लेकर शक जता रहे हैं कि क्या दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता हो पाएगा। इस तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा की कीमतों पर दिखने लगा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का क्या हाल है?
दोनों देशों के बीच बातचीत पाकिस्तान की मध्यस्थता से चल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बताया कि बातचीत में कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि उन्हें अमेरिका का नया प्रस्ताव मिला है और वे अभी उसकी समीक्षा कर रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया कि वे ईरान के जवाब के लिए कुछ दिनों तक इंतजार करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने सही जवाबों की मांग की ताकि संघर्ष दोबारा शुरू न हो।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सैन्य कार्रवाई
शांति वार्ता में देरी की आशंका की वजह से US oil prices में उछाल आया है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के लिए 94 जहाजों का रास्ता बदला और 4 जहाजों को बंद कर दिया ताकि व्यापार को रोका जा सके। दूसरी तरफ, इसराइल ने दक्षिण लेबनान में हमला किया, जिसमें एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा और 9 लोग घायल हो गए।
पाकिस्तान की भूमिका और आगामी कदम
पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने में एक अहम कड़ी बना हुआ है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir 21 मई 2026 को तेहरान पहुंचे ताकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। दुनिया भर के देशों की नजरें अब इस बात पर हैं कि ईरान अमेरिका के प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में कोई बड़ी सफलता न मिलने की आशंका के कारण निवेशकों में डर है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
पाकिस्तान इस मामले में क्या भूमिका निभा रहा है?
पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ का काम कर रहा है और उसके आर्मी चीफ Asim Munir बातचीत को सफल बनाने के लिए तेहरान गए थे।
