पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता की मेजबानी की है. इस बातचीत का मकसद क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म कर शांति लाना है. शनिवार 11 अप्रैल 2026 से शुरू हुई ये औपचारिक बातचीत अब अपने तीसरे दौर में पहुंच गई है.

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शांति वार्ता की मुख्य बातें क्या हैं?

पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी थी. इसके बाद शनिवार को इस्लामाबाद में औपचारिक बातचीत शुरू हुई. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया. इस समय इस्लामाबाद में सुरक्षा बहुत कड़ी है और सड़कों पर सन्नाटा देखा जा रहा है.

कौन लोग शामिल हैं और ईरान की मांगें क्या हैं?

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति J.D. Vance कर रहे हैं, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं. वहीं ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत कर रहे हैं. ईरान ने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें अमेरिकी हमलों के नुकसान की भरपाई, जमी हुई संपत्ति को वापस लेना और लेबनान में इजरायली हमलों को पूरी तरह रोकना शामिल है.

अभी क्या स्थिति है और आगे क्या होगा?

दोनों देशों के विशेषज्ञ अब लिखित दस्तावेजों पर चर्चा कर रहे हैं. व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि यह दशकों बाद पहली बार है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधे आमने-सामने बातचीत हो रही है. हालांकि, पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा कि 47 साल के तनाव के बाद समाधान में समय लग सकता है. इस बीच खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की गतिविधियों में कमी देखी गई है.