अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी कोशिश शुरू हुई है. इस मामले में पाकिस्तान एक बीच के रास्ते की तरह काम कर रहा है. आज यानी 21 मई 2026 को पाकिस्तान के बड़े अधिकारी तेहरान जा रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके.

अमेरिका ने क्या शर्तें रखी हैं?

अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 पॉइंट्स वाला एक ड्राफ्ट भेजा है. इसमें मांग की गई है कि तुरंत युद्धविराम हो और Strait of Hormuz को दोबारा खोला जाए. साथ ही, यूरेनियम संवर्धन (enrichment) के काम को रोकने की बात कही गई है. बदले में अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और ईरान की जमा पूंजी वापस करने के लिए तैयार है.

ईरान की मांगें और पाकिस्तान का रोल क्या है?

पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir और गृह मंत्री Mohsin Naqvi इस बातचीत में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच एकमात्र मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है. वहीं ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है. ईरान चाहता है कि Strait of Hormuz पर उसका कंट्रोल रहे और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा मिले. ईरान के सुप्रीम लीडर ने यूरेनियम को बाहर भेजने पर रोक लगा दी है, जिससे बातचीत थोड़ी मुश्किल हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि वह ईरान के जवाब के लिए कुछ दिन इंतज़ार करेंगे.

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान की इस बातचीत में क्या भूमिका है?

पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच एकमात्र मध्यस्थ (intermediary) के रूप में काम कर रहा है. वह दोनों देशों के बीच संदेश पहुँचाने और मीटिंग की जगह तय करने का काम कर रहा है.

अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद क्या है?

अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन रोके और जलमार्ग खोले, जबकि ईरान प्रतिबंधों की पूरी समाप्ति, संपत्ति की वापसी और अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग कर रहा है.