अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए राजनयिक कोशिशें बहुत तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस से फोन पर बातचीत की है। वहीं पाकिस्तान इस मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसके सैन्य प्रमुख खुद तेहरान पहुंचे हैं। अमेरिकी सरकार ने भी इस बातचीत में थोड़ी प्रगति होने की बात स्वीकार की है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और बातचीत में क्या प्रगति हुई है?

सुलह कराने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे। उन्होंने अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व के बीच शांति समझौता कराने के लिए ईरानी अधिकारियों से लंबी मुलाकातें की हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी दी कि बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन अभी बहुत ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि बुनियादी शर्तें अभी भी वही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि गंभीर बातचीत चलने के कारण वे अभी कोई सैन्य कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

ईरान का इस बातचीत पर क्या रुख है?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने साफ किया कि बातचीत का मतलब घुटने टेकना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी गरिमा, अधिकार और देश के हितों की रक्षा के साथ ही बातचीत की मेज पर आया है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने किसी भी बड़े समझौते की खबरों को अभी जल्दबाजी बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी बहुत गहरे और महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं, जिन्हें सुलझाना आसान नहीं है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

इस पूरी बातचीत में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मुद्दा सबसे बड़ा बना हुआ है। ईरान ने इस मार्ग को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया है और जहाजों के गुजरने के लिए टैक्स सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे अमेरिका ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान की प्राथमिकता पहले युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त कराने की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने वाला है?

बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी गंभीर मतभेद हैं, इसलिए तत्काल समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

पाकिस्तान इस मामले में क्या भूमिका निभा रहा है?

पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका में है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख और गृह मंत्री तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ शांति समझौते को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं।