अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत को लेकर सकारात्मक दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने सख्त चेतावनी जारी की है। अगर अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई, तो ईरान लाल सागर के व्यापारिक रास्तों को बंद कर सकता है। इस स्थिति से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
शांति वार्ता और दूसरे दौर की बातचीत का क्या अपडेट है?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का पहला दौर पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुआ था, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance ने किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि दूसरा दौर जल्द ही पाकिस्तान में हो सकता है और दोनों देश समझौते के बहुत करीब हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी Karoline Leavitt के बयानों में विरोधाभास दिखा है, जहाँ हालिया रिपोर्टों में कहा गया कि तेहरान बातचीत से पीछे हट गया है और राजनयिक प्रयास विफल रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?
ईरान के सैन्य कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखता है, तो ईरान बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। ईरान ने साफ कहा है कि वह फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी आयात या निर्यात की अनुमति नहीं देगा। ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन मानता है और इसके जवाब में व्यापार को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
वर्तमान स्थिति और विवाद के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
वर्तमान में ओमान की खाड़ी और लाल सागर में अमेरिका के 10,000 सैनिक और दर्जनों युद्धपोत तैनात हैं। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीति को लेकर है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 8 अप्रैल को दो सप्ताह का युद्धविराम घोषित किया था, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी इस मामले में मध्यस्थता के लिए तेहरान पहुंचे हैं।
