अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत शुरू हुई है। ट्रंप प्रशासन ने एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हो सकता है। इस योजना में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और आर्थिक मदद को परमाणु नियमों के पालन और क्षेत्रीय सुरक्षा की शर्तों से जोड़ा गया है।

राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि एक समझौता (MoU) लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने संकेत दिया कि सीजफायर के बाद Strait of Hormuz फिर से खुल सकता है। राष्ट्रपति ने ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकाबंदी को खत्म करने का आदेश भी दिया है। उपराष्ट्रपति JD Vance के मुताबिक, यह समझौता करीब डेढ़ पेज का है और 60 दिनों की बातचीत की खिड़की में पहले 30 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।

अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि जब तक ईरान समझौते की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक उसे कोई राहत नहीं मिलेगी। अमेरिका चाहता है कि ईरान आतंकवादी संगठनों को फंड देना बंद करे और क्षेत्रीय शांति का वादा करे।

दूसरी ओर, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने इस समझौते की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि यह औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही लागू होगा। ईरान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट Mohammad Reza Aref ने इसे पहला कदम बताया है। ईरान ने मांग की है कि अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले उसके करीब 24 अरब डॉलर के जमे हुए फंड्स का आधा हिस्सा वापस दिया जाए। साथ ही ईरान का कहना है कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दों तक सीमित रहेगी, इसमें मिसाइल प्रोग्राम या अन्य समूहों की बात नहीं होगी।

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और कतर अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। समझौते पर हस्ताक्षर के लिए स्विट्जरलैंड में एक समारोह होने की उम्मीद है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की 4 जून 2026 की रिपोर्ट में ईरान पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने परमाणु निगरानी नियमों का उल्लंघन किया है और फरवरी 2026 के बाद वहां वेरिफिकेशन की गतिविधियां बंद हो गई थीं।