US और Iran के बीच शांति वार्ता रुकी, Hormuz Strait को खोलने और युद्ध के हालातों पर फंसी बात.

Praggya Singh sabal11 August 20263 min read79 viewsWorld
US और Iran के बीच शांति वार्ता रुकी, Hormuz Strait को खोलने और युद्ध के हालातों पर फंसी बात.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता इस समय पूरी तरह से रुक गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस भयंकर संघर्ष को खत्म करना और महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को फिर से खोलना था। इस पूरे मामले में 'Lincoln quagmire' यानी लिंकन दलदल वाली बात तेजी से फैल रही है, जिससे अमेरिका के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। सैन्य परिवारों की तरफ से USS Abraham Lincoln युद्धपोत के लंबे समय तक समुद्र में रहने को लेकर चिंता जताई जा रही है। 11 अगस्त 2026 तक की स्थिति के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रतिबंधों को ही मुख्य हथियार बनाया है और उनका कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है।

युद्ध के मुआवजे और पुरानी शर्तों पर अड़े दोनों देश

ईरान की तरफ से अमेरिका से युद्ध हर्जाने की पुरानी शर्त पर कड़ा जवाब देते हुए राष्ट्रपति Donald Trump ने 10 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका भी दशकों पुराने हमलों और हत्याओं के लिए ईरान से पूरा मुआवजा मांगेगा। इस नई मांग की वजह से दोनों देशों के बीच मामले का जल्दी हल निकलना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। अमेरिकी सरकार को उम्मीद थी कि महीनों तक हुई बमबारी की वजह से ईरान काफी कमजोर हो गया है, जिससे मजबूर होकर वहां के नेता अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद कर देंगे और Strait of Hormuz को पूरी तरह से चालू कर देंगे। आर्थिक मोर्चे पर ईरान की हालत बहुत खराब है, जहां इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी IMF के मुताबिक अर्थव्यवस्था में 5.4% की बड़ी गिरावट आई है, और ईरान सरकार ने खुद सालाना महंगाई दर 88.6% बताई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान रोज औसतन 1.8 मिलियन बैरल तेल बेचता था, जो पिछले महीने घटकर 500,000 बैरल प्रतिदिन से भी कम रह गया है।

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सेना में बड़ा बदलाव और युद्धपोत को लेकर चिंता

इन तमाम राजनीतिक और आर्थिक दबावों के बीच ईरान अपनी सेना में बहुत बड़ा बदलाव कर रहा है। 10 अगस्त 2026 को देश के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने आर्म्ड फोर्सेज जनरल स्टाफ यानी AFGS के प्रमुख मेजर जनरल Ali Abdollahi Aliabadi को आदेश दिया कि वे AFGS और खातम उल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर का विलय जल्द पूरा करें। इस बड़े बदलाव का मकसद सेना की दोनों शाखाओं यानी Artesh और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्क्स यानी IRGC के बीच तालमेल को बेहतर करना है, ताकि युद्ध के समय फैसले तुरंत लिए जा सकें। इसके अलावा सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई बड़े सैन्य पदों पर नई नियुक्तियां भी की गईं। दूसरी तरफ, USS Abraham Lincoln युद्धपोत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं क्योंकि इसने लगातार समुद्र में रहने का आधुनिक रिकॉर्ड बना लिया है। मार्च और अप्रैल 2026 में ईरान ने फारस की खाड़ी में इस विमान वाहक पोत पर हमला करने का दावा किया था, जिसे अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने बार-बार खारिज करते हुए कहा था कि यह जहाज पूरी तरह से सुरक्षित और चालू हालत में है।

पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता पर मंडराया संकट

ईरान का रक्षा मंत्रालय लगातार अमेरिका की स्थिति को युद्ध का दलदल बता रहा है और सीधी बातचीत करने से साफ मना कर रहा है। शांति प्रयासों की खबरों को नियंत्रित करने के लिए ईरान केवल पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता की बात पर अड़ा हुआ है। 11 अगस्त 2026 की कई रिपोर्टों में अमेरिका के लिए इसे शर्मनाक दलदल बताया गया, क्योंकि वहां हथियारों का स्टॉक कम हो रहा है और युद्ध के लक्ष्यों को पाने में दिक्कतें आ रही हैं। सीनेटर Chris Murphy ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति Donald Trump पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि वे ईरान के मामले में अमेरिकी जनता को गुमराह कर रहे हैं और शांति समझौते का झूठा वादा करके बाजार में हेरफेर कर रहे हैं। इस बारे में आप Senator Chris Murphy के आधिकारिक बयान में पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं। पाकिस्तान और कतर की मदद से चल रही इस्लामाबाद मेमोरेंडम की बातचीत पर भी भारी दबाव है क्योंकि मध्यस्थ देश अपने कूटनीतिक काम को तेज कर रहे हैं, जबकि ओमान भी अपने पुराने क्षेत्रीय रिश्तों की वजह से इस मामले में एक अहम देश बना हुआ है।

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