स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बड़े स्तर की बातचीत शुरू हो गई है। इस पूरी मीटिंग के लिए सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए गए हैं और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया है। अब दोनों देश इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि पहले से हुए समझौतों को असलियत में कैसे लागू किया जाए ताकि इलाके में शांति बनी रहे।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 17-18 जून के आसपास एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर इलेक्ट्रॉनिक साइन किए थे। इसी समझौते को लागू करने के लिए अब राजनयिक स्विट्जरलैंड में जुटे हैं। हालांकि, 19 जून को होने वाली बड़ी मीटिंग लेबनान में Israel और Hezbollah के बीच बढ़ी लड़ाई की वजह से टालनी पड़ी थी। अब 20 जून से तैयारी के लिए तकनीकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अमेरिका की तरफ से विशेष प्रतिनिधि Steve Witkoff और Jared Kushner स्विट्जरलैंड पहुँच चुके हैं। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि वह भी अगले दो दिनों में वहाँ पहुँचेंगे और 21 जून से आमने-सामने की बातचीत शुरू हो सकती है।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baghai ने कहा कि उनके वार्ताकार स्विट्जरलैंड जा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने लेबनान में युद्धविराम के नियमों को तोड़ा है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी शांति की जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं, तो वह Strait of Hormuz को बंद कर सकता है।
इस पूरी बातचीत में Qatar और Pakistan अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman al-Thani ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री Ignazio Cassis से मुलाकात की और क्षेत्रीय हालातों पर चर्चा की।
राष्ट्रपति Donald Trump ने शांति की बात तो की है, लेकिन साथ ही सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम समझौता आखिरी नहीं है और अगर बातचीत के नतीजे उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो वह ईरान पर बमबारी भी कर सकते हैं। वहीं, US Central Command (Centcom) ने कहा है कि उनकी सेना पूरी तरह सतर्क है ताकि समझौते का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
स्विट्जरलैंड सरकार ने इन बातचीत के लिए एक गुप्त और सुरक्षित माहौल दिया है। सुरक्षा इतनी सख्त है कि रिसॉर्ट के पास के हाइकिंग ट्रेल्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट रास्तों को बंद कर दिया गया है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए मीटिंग में शामिल लोगों के नाम बताने से इनकार कर दिया है।