अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता करने के लिए Switzerland में बड़ी बैठक होने वाली है। इसमें अमेरिका के विशेष दूत और ईरान के विदेश मंत्री शामिल होंगे। लेकिन इस बीच Lebanon में Israel के हमलों ने इस समझौते की राह में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
शांति समझौते की कोशिशें
खबर है कि अमेरिका के स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के साथ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची Switzerland पहुंच रहे हैं। इन नेताओं के बीच एक शांति समझौते को अंतिम रूप देने पर बात होगी। पहले यह बैठक 19 जून 2026 को होनी थी, लेकिन Israel और हिज़्बुल्लाह की लड़ाई की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया था। अब युद्धविराम लागू होने के बाद अमेरिकी दूत वहां पहुंच रहे हैं।
MoU में क्या है खास
अमेरिका और ईरान ने पहले ही 14 पॉइंट का एक समझौता पत्र (MoU) साइन किया है। इस MoU में सैन्य हमलों को पूरी तरह बंद करने और 60 दिनों के भीतर अंतिम डील करने की बात कही गई है। इसमें ईरान पर लगी पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी चर्चा करने की योजना भी शामिल है।
ईरान की शर्त और कतर की भूमिका
ईरान ने साफ कहा है कि वह इस बातचीत में तभी रहेगा जब Lebanon में युद्ध पूरी तरह रुक जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अगर MoU का उल्लंघन हुआ तो इसके लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा। वहीं, Qatar के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए Switzerland पहुंच चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी Israel से बात कर उन्हें युद्धविराम के लिए मनाने की कोशिश की थी।
लेबनान में फिर बढ़ी हिंसा
एक तरफ जहां शांति की बात चल रही है, वहीं दूसरी तरफ Lebanon में हालात फिर बिगड़ गए हैं। 20 जून को Israel ने लेबनान के नबातिएह इलाके में एयर स्ट्राइक और ड्रोन हमले किए, जिनमें कम से कम 5 लोगों की मौत हुई। इससे पहले 19 जून को हुई लड़ाई में 4 इजरायली सैनिक और लेबनान में कई लोग मारे गए थे।
इजराइल का कड़ा रुख
Israel के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि वे Lebanon बॉर्डर पर अपना सुरक्षा क्षेत्र (Buffer Zone) बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि Israel हिज़्बुल्लाह से इसकी भारी कीमत वसूल करेगा और वे ईरान द्वारा तय किए गए किसी भी नए समीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे।