अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही शांति बातचीत में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान की जमी हुई संपत्ति को फिर से खोलने पर सहमत हो सकता है। हालांकि, यह पैसा केवल अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूं की खरीदारी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
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JD Vance ने बताया कि यह बातचीत एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी बुनियाद तैयार कर चुकी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जमी हुई संपत्ति का इस्तेमाल केवल आम नागरिकों की मदद के लिए होगा और इसका उपयोग किसी भी सैन्य गतिविधि के लिए नहीं किया जाएगा।
बातचीत की प्रगति पर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़ी कामयाबी मिली है। इसमें तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट, नाकाबंदी हटाना और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ी योजना शुरू करना शामिल है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने भी इस पहल का स्वागत किया है और माना है कि इससे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नए रास्ते खुलेंगे।
इससे पहले 18 जून 2026 को एक अंतरिम समझौता हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान पर चल रहे युद्ध को रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर चर्चा करना था। उस समय अमेरिकी योजना में 6 अरब डॉलर की संपत्ति को अनलॉक करना शामिल था, ताकि मानवीय सामान खरीदा जा सके और इससे अमेरिकी किसानों को भी लाभ मिले।
हालांकि, इस मुद्दे पर पहले काफी खींचतान रही है। JD Vance ने पहले कहा था कि केवल समझौता करने या मीटिंग में आने से पैसे नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने 15 और 16 जून को स्पष्ट किया था कि फंड तभी जारी होंगे जब ईरान अपने यूरेनियम भंडार को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
जून की शुरुआत में भी दोनों देशों के बीच गतिरोध था क्योंकि ईरान तुरंत अपनी संपत्ति वापस चाहता था। वहीं अमेरिकी अधिकारी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना था कि शांति समझौता होने से पहले कोई भी संपत्ति वापस नहीं की जाएगी।
