अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ शांति समझौता अभी नजदीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि कोई समझौता होने में हफ्ते लगेंगे या महीने। दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर बातचीत चल रही है, लेकिन मुख्य मुद्दों पर अभी भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

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ईरान और अमेरिका की बातचीत में कहां फंसा है पेंच?

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में कई बड़े गतिरोध बने हुए हैं। ईरान का कहना है कि वह किसी रियायत की तलाश में नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों की बहाली चाहता है। ईरान की मुख्य मांग प्रतिबंधों को हटाना और फ्रीज किए गए फंड को जारी करना है। इसके साथ ही, ईरान ने अमेरिकी नौसेना द्वारा अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी को पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) छोड़ना होगा। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी ईरानी टोल सिस्टम को स्वीकार करने से मना कर दिया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और बातचीत की वर्तमान स्थिति

इस विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर और आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान का दौरा किया है। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के साथ बैठकें की हैं और युद्ध को समाप्त करने के प्रस्तावों पर चर्चा की है। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत में थोड़ी प्रगति की बात स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने किसी भी जल्दबाजी से इनकार किया है और जरूरत पड़ने पर ‘प्लान बी’ तैयार रखने की बात कही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मुख्य विवाद क्या हैं?

दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने, फ्रीज किए गए फंड को जारी करने और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी को लेकर है।

इस बातचीत में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस वार्ता में मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख और आंतरिक मंत्री ने तेहरान का दौरा कर ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की है।