अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी करने का बड़ा फैसला लिया है. इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है. इस फैसले से दुनिया भर के व्यापार और तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ सकता है.

ℹ: Lebanon में इसराइल का कहर, 2 हजार से ज़्यादा लोग मारे गए, Bint Jbeil में भारी जंग जारी

अमेरिका ने क्या कदम उठाए और क्यों

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू होगी. उन्होंने नौसेना को आदेश दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में उन सभी जहाजों को रोका जाए जिन्होंने ईरान को टोल दिया है. इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था.

ईरान की प्रतिक्रिया और चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है. ईरान की सेना ने इसे समुद्री डकैती करार दिया है और चेतावनी दी है कि अगर उनके शिपिंग हब को खतरा हुआ, तो वे फारस की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाएंगे. वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आने वाले किसी भी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा.

आम जनता और वैश्विक व्यापार पर क्या होगा असर

इस विवाद का सबसे बड़ा असर तेल की सप्लाई और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ सकता है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है. चीन ने भी इस स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है. गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा युद्धविराम 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.