अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब और बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है जिससे समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ रहा है। अब तक 38 जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है। इस पूरी कार्रवाई से खाड़ी देशों और दुनिया भर के व्यापारियों में डर का माहौल है।

अमेरिका ने यह घेराबंदी क्यों की और अब तक क्या हुआ?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू हुई थी। US Central Command (CENTCOM) ने साफ़ किया है कि यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के पोर्ट्स में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। Treasury Secretary Scott Bessent के मुताबिक इस कदम का मकसद ईरान की कमाई के मुख्य ज़रिये यानी तेल के कारोबार को रोकना और Kharg Island के स्टोरेज को भरना है।

  • अब तक कुल 38 जहाजों को वापस लौटाया गया है।
  • Defense Secretary Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी जहाजों या ताकतों को खतरा हुआ तो वे उन्हें नष्ट कर देंगे।
  • अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त बल और उपकरण हैं और यह ऑपरेशन तब तक चलेगा जब तक लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता।

ईरान का क्या रिएक्शन है और क्या कदम उठाए गए?

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को गैरकानूनी और समुद्री डकैती बताया है। ईरान की High Council for Human Rights ने 26 अप्रैल को इसे युद्ध अपराध और आम जनता के खिलाफ सामूहिक सजा कहा है। ईरान का दावा है कि इस घेराबंदी की वजह से ज़रूरी सामानों की सप्लाई रुक रही है जिससे लाखों नागरिक परेशान हो रहे हैं।

  • IRGC ने एलान किया था कि जब तक अमेरिकी घेराबंदी नहीं हटती, Strait of Hormuz बंद रहेगा।
  • ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq से Muscat में मुलाक़ात की।
  • इस मुलाक़ात का मुख्य मकसद समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था।

क्या अमेरिकी घेराबंदी वास्तव में असरदार है?

एक तरफ अमेरिका इसे सफल बता रहा है, वहीं कुछ रिपोर्ट्स अलग कहानी कह रही हैं। TankerTrackers.com के आंकड़ों के अनुसार, इस पाबंदी के बावजूद ईरान अभी भी लाखों बैरल कच्चा तेल बाहर भेजने में कामयाब रहा है। Center for Strategic and International Studies (CSIS) ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की है कि सैन्य ताकत की भी कुछ सीमाएं होती हैं और दोनों देश फिलहाल एक दूसरे पर पाबंदी लगा रहे हैं।