अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ी, बंदरगाहों की नाकेबंदी पर हुआ बड़ा विवाद, ट्रंप ने लिया कड़ा फैसला
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने दावा किया कि अमेरिका बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने को तैयार है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सिरे से नकार दिया है। इस खींचतान के बीच जहाजों की जब्ती और तेल आपूर्ति पर संकट जैसे गंभीर हालात बन गए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है पूरा विवाद?
ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने बताया कि उन्हें संकेत मिले हैं कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक यह नाकेबंदी नहीं हटती, तब तक ईरान शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल 2026 को ऐलान किया कि पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम तो बढ़ाया जाएगा, लेकिन अमेरिकी सेना बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखेगी।
जहाजों की जब्ती और तेल संकट का खतरा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया है कि सभी देशों के जहाजों पर यह पाबंदी लागू रहेगी, चाहे वे ईरानी बंदरगाहों में जा रहे हों या वहां से निकल रहे हों। इस दौरान अमेरिका ने ‘Touska’ नाम के एक ईरानी कार्गो जहाज को जब्त कर लिया, जिसे ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और समुद्री डकैती करार दिया है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि इस नाकेबंदी की वजह से ईरान के खार्ग आइलैंड पर तेल स्टोरेज भर जाएगा और उसके तेल के कुएं बंद करने पड़ेंगे।
क्या बातचीत की कोई गुंजाइश बची है?
तनाव की वजह से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा टाल दी गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों का जवाब नहीं दिया और नाकेबंदी हटने तक बातचीत से इनकार कर दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने युद्धविराम जारी रखने की अपील की है। दूसरी तरफ, लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के ‘शैडो फ्लीट’ के करीब 26 जहाज चुपके से इस अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़कर सामान बाहर भेजने में कामयाब रहे हैं।