अमेरिका और ईरान के बीच 2026 से जारी जंग को रोकने के लिए एक बड़ा समझौता होने की उम्मीद बढ़ गई है। दुनिया भर के देश इस बड़े फैसले का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत करने वाले अधिकारियों को जल्दबाजी न करने की सलाह दी है और कहा है कि समय हमारे पास है। वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और युद्धविराम के लिए उसकी अपनी मांगें हैं। इस संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है लेकिन कई मुद्दों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है।

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समझौते की मुख्य बातें और किस बात पर फंसा है पेंच?

इस संभावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और जंग को रोकने के लिए कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 60 दिनों का युद्धविराम: समझौते के तहत 60 दिनों के लिए जंग रोकने की योजना है, जिसके दौरान ईरान को अपना तेल बेचने की छूट मिल सकती है।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अमेरिका की मांग है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बिना किसी टैक्स के पूरी तरह खोला जाए, जबकि ईरानी मीडिया का कहना है कि ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है।
  • यूरेनियम का मुद्दा: अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम को बढ़ाना बंद करे, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने साफ किया है कि उनका परमाणु कार्यक्रम इस समझौते का हिस्सा नहीं है और वे अपना यूरेनियम स्टॉक नहीं सौंपेंगे।
  • प्रतिबंधों को हटाना: ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने और उसके जमे हुए पैसों को वापस करने पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें ईरान ने अमेरिका पर बाधा डालने का आरोप लगाया है।

नेताओं और मंत्रालयों की तरफ से जारी आधिकारिक बयान

इस युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच अलग-अलग देशों के नेताओं ने अपनी बातें सामने रखी हैं:

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप: उन्होंने कहा कि जब तक समझौता पूरी तरह तैयार और हस्ताक्षरित नहीं हो जाता, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो: उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोई अच्छी खबर मिल सकती है जिससे इस क्षेत्र में शांति का रास्ता साफ होगा।
  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी: उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख को बताया कि अमेरिका की जरूरत से ज्यादा मांगें इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उन्होंने लेबनान में हिजबुल्लाह को अपना समर्थन जारी रखने की बात भी दोहराई है।
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ: पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उन्होंने अगली शांति वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई है।
  • यूरोपीय संघ और ब्रिटेन: यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस समझौते की दिशा में हो रही प्रगति का स्वागत किया है और शांति की उम्मीद जताई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने का समझौता फाइनल हो गया है?

नहीं, अभी समझौता पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ है। बातचीत जारी है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक समझौता पूरी तरह साइन नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी।

ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्या स्टैंड है?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को सौंपने के लिए तैयार नहीं है और उसका परमाणु कार्यक्रम इस समझौते का हिस्सा नहीं है।

इस समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का क्या महत्व है?

यह दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है। अमेरिका चाहता है कि इसे बिना किसी टैक्स या टोल के पूरी तरह खोला जाए, जबकि ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।