अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि वाशिंगटन और तेहरान ने सैन्य हमलों को रोकने (stand down) पर सहमति जताई है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि दोनों देश फिर से बातचीत कर सकें और Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने का रास्ता साफ हो सके।
दोहा में होगी अहम मीटिंग
दोनों देशों के बीच एक बहुत जरूरी मीटिंग मंगलवार, 30 जून 2026 को कतर के दोहा में होने वाली है। पहले यह मीटिंग स्विट्जरलैंड में होनी थी, लेकिन अब इसे दोहा शिफ्ट कर दिया गया है। इस बार बातचीत का मुख्य मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि Strait of Hormuz में जहाजों के गुजरने की शर्तों को सुलझाना होगा।
कैसे शुरू हुआ विवाद और क्या है समझौता
दरअसल, 17 से 21 जून 2026 के बीच स्विट्जरलैंड के लेक लुसर्न समिट में एक समझौता (MoU) हुआ था। इसमें कतर और पाकिस्तान ने बीच-बचाव किया था। इस समझौते के तहत ईरान ने जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया था और अमेरिका ने अपनी नौसेना की नाकाबंदी (naval blockade) हटाने की बात मानी थी। लेकिन पिछले वीकेंड हालात फिर बिगड़ गए।
- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले के आदेश दिए थे।
- जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- इस खींचतान की वजह से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर दबाव बढ़ा।
अभी भी कुछ चुनौतियां बाकी हैं
भले ही हमले रुकने की बात कही गई है, लेकिन अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है। रविवार को एक ईरानी अधिकारी ने कहा था कि ईरान इन बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा क्योंकि अमेरिका ने फ्रीज किए हुए फंड्स नहीं दिए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत रद्द नहीं हुई है और सब कुछ तय समय पर होगा।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि Strait of Hormuz के ट्रैफिक को मैनेज करने की पूरी जिम्मेदारी ईरान की है। वहीं, अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने चेतावनी दी है कि अगर जहाजों को खतरा हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा।
