अमेरिका और ईरान एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। Strait of Hormuz के कंट्रोल को लेकर दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं। इस वजह से 17 जून 2026 को हुआ युद्धविराम समझौता (MoU) अब टूटने की कगार पर है।

हाल की घटनाओं की बात करें तो 25 जून 2026 को ईरान के एक ड्रोन ने Strait of Hormuz से गुजर रहे सिंगापुर के कार्गो शिप M/V Ever Lovely पर हमला किया। इसके जवाब में 27 जून को अमेरिकी सेना ने Qeshm Island और तट के पास स्थित ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया।

तनाव यहीं नहीं रुका, 28 जून 2026 को ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान के IRGC ने चेतावनी दी कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो अमेरिकी बेस को भारी नुकसान होगा। जवाब में अमेरिका ने भी ईरान के रडार और ड्रोन स्टोरेज केंद्रों पर हमले किए।

अमेरिका के UN राजदूत Mike Waltz और उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि अगर समुद्री जहाजों को खतरा हुआ तो अमेरिका कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि Strait of Hormuz के ट्रैफिक को संभालने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ ईरान की है।

राहत की बात यह है कि 29 जून 2026 को दोनों देश फिलहाल हमले रोकने और बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। अब 30 जून 2026 को कतर के दोहा में नई बातचीत होगी। पहले यह मीटिंग स्विट्जरलैंड में होनी थी, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण इसे दोहा शिफ्ट किया गया है।

बता दें कि 17 जून को हुए ‘Islamabad MoU’ में तय हुआ था कि सभी सैन्य ऑपरेशन बंद होंगे और ईरान 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क के Strait of Hormuz को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलेगा। अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने का वादा किया था, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास ने इस समझौते को कमजोर कर दिया है।

Sushma Kumari

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