Strait of Hormuz को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है और अब अमेरिका ने इस रास्ते की नाकेबंदी कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। इस वजह से दुनिया के तेल व्यापार में बड़ी रुकावट आई है और खाड़ी देश अब दूसरे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। इस पूरे विवाद का असर आम लोगों और वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या विवाद हुआ है?

अमेरिका ने घोषणा की है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आने-जाने वाले सभी जहाजों की जांच करेगा और ईरान को टोल देने वाले जहाजों को रोकेगा। 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे ET से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू हो गई है। वहीं ईरान का कहना है कि यह रास्ता उसके नियंत्रण में है और बिना अनुमति कोई जहाज यहाँ से नहीं गुजर सकता। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि सैन्य जहाजों का पास आना संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा।

शिपिंग और तेल सप्लाई पर क्या असर पड़ा है?

इस नाकेबंदी की वजह से समुद्री यातायात लगभग थम गया है। कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने काम बंद कर दिए हैं या जहाजों का रास्ता बदल दिया है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश अब पाइपलाइनों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि तेल की सप्लाई जारी रहे। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर है, जिससे यहाँ LPG और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

मुख्य विवरण जानकारी
नाकेबंदी की तारीख 13 अप्रैल 2026
अमेरिकी युद्धपोत USS Frank E. Petersen Jr और USS Michael Murphy
सऊदी पाइपलाइन ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (70 लाख बैरल प्रतिदिन)
यूएई पाइपलाइन हबशान-फुजैरा पाइपलाइन
दुनिया का तेल व्यापार करीब 20-25% तेल इसी रास्ते से गुजरता है
भारत पर प्रभाव LPG और गैस की सप्लाई में दिक्कत
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बड़े अधिकारियों ने इस बारे में क्या कहा है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए जलडमरूमध्य को साफ करना शुरू कर चुका है। CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि अमेरिका वाणिज्य के मुक्त प्रवाह के लिए एक नया सुरक्षित मार्ग स्थापित करेगा। दूसरी ओर, ADNOC के CEO सुल्तान अल जाबेर ने ईरान द्वारा लगाए गए नियमों की आलोचना करते हुए इसे नियंत्रण की कोशिश बताया है।