अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। Strait of Hormuz में अमेरिकी नौसेना अब ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने के काम में जुटी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका ने शुरुआत में तो सख्त कदम उठाए लेकिन अब वह नए विकल्पों की तलाश कर रहा है क्योंकि ईरान पर इस नाकेबंदी का ज्यादा असर नहीं दिख रहा है।

Strait of Hormuz में क्या हो रहा है और अमेरिका की क्या तैयारी है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि US Navy अभी समुद्र से ईरानी बारूदी सुरंगें हटा रही है। इस काम को पूरा होने में कई महीनों का समय लग सकता है, भले ही दोनों देशों के बीच अभी युद्धविराम चल रहा है। इस ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • अमेरिका ने मध्य पूर्व में दो littoral combat ships तैनात किए हैं जो बारूदी सुरंगों को हटाने में सक्षम हैं।
  • दो और Avenger-class minesweepers को इस क्षेत्र की ओर भेजा गया है।
  • 13 अप्रैल 2026 से लागू नाकेबंदी के तहत अब तक 34 जहाजों को वापस मोड़ा जा चुका है।
  • हाल ही में M/V Sevan नाम के एक प्रतिबंधित मर्चेंट जहाज को पकड़कर वापस ईरान भेजा गया है।

ईरान का क्या रुख है और शांति वार्ता का क्या हाल है?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं लेकिन हालात अभी भी नाजुक हैं। इस मामले में मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi 26 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता छोड़कर ओमान चले गए।
  • ईरान का कहना है कि उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी करना युद्ध शुरू करने जैसा है।
  • 22 अप्रैल को ईरान ने तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था।
  • ईरान ने छोटे जहाजों के जरिए समुद्र में और बारूदी सुरंगें बिछाईं, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसी किसी भी नाव को नष्ट करने का आदेश दिया।
  • अब जहाजों को ईरान के तट के पास उत्तरी रूट (northern route) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और बीमा कंपनियों ने भी अधिकारियों से संपर्क करने को कहा है।

एक्सपर्ट Bryan Clark ने अमेरिकी रणनीति पर क्या कहा?

Naval warfare स्पेशलिस्ट Bryan Clark ने Al Jazeera को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में अपने सबसे सख्त कदम उठाए थे लेकिन अब वह विकल्पों की कमी महसूस कर रहा है। उनका मानना है कि समुद्र की नाकेबंदी से ईरान को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 34 टैंकर इस नाकेबंदी को चकमा देने में सफल रहे हैं।