खाड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। 15 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण नहीं है। अमेरिकी सेना ने जलमार्ग और ईरान के दक्षिणी तट के पास मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर कई हमले किए। इन हमलों में सैन्य संपत्तियां, गोला-बारूद डिपो, संचार नेटवर्क और तटीय रक्षा प्रणालियां मुख्य रूप से निशाना बनाई गई हैं।

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तनाव का कारण और ईरान की प्रतिक्रिया

CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने ईरान पर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। पिछले एक हफ्ते में सात व्यावसायिक जहाजों पर हमले हुए, जिसमें करीब एक दर्जन नागरिक मारे गए या घायल हुए। अमेरिका ने 14 जुलाई 2026 को ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू की है।

इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामकता बंद नहीं करता, होर्मुज का रास्ता बंद रहेगा। ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं और सेना की रिपोर्ट के मुताबिक सात सैन्यकर्मी मारे गए हैं।

सीजफायर खत्म और आगे की स्थिति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में हुए उस समझौते को खत्म करने का ऐलान किया, जिसका उद्देश्य होर्मुज के रास्ते को सुरक्षित रखना था। अब अमेरिका ने गल्फ देशों के साथ व्यापार और निवेश सौदों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। हालांकि, चेतावनी दी गई है कि अगर ईरान किसी डील के लिए तैयार नहीं होता है, तो अगले हफ्ते ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले किए जा सकते हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com