अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों में खींचतान चल रही है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह ईरान को इस समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण नहीं बनाने देगा। इस विवाद की वजह से दुनिया भर के व्यापार और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रस्ताव रखा है?
27 अप्रैल 2026 को ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया। इसमें Strait of Hormuz को दोबारा खोलने और चल रहे विवाद को खत्म करने की बात कही गई। ईरान ने इस डील के तहत परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसके बदले में ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाई गई नाकाबंदी को पूरी तरह हटा ले।
अमेरिका और व्हाइट हाउस का इस पर क्या कहना है?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Olivia Wales ने बयान दिया कि अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका केवल ऐसा समझौता करेगा जिसमें अमेरिकी लोगों का हित सबसे ऊपर हो और ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार न मिलें।
वहीं, राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान का नया प्रस्ताव पहले के मुकाबले बेहतर है। उन्होंने शर्त रखी कि किसी भी डील के लिए यह जरूरी है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह सीधे तौर पर संपर्क कर सकता है।
नाकाबंदी से जहाजों और व्यापार पर क्या असर हुआ?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों ने Strait of Hormuz की नाकाबंदी कर रखी है, जिससे यह रास्ता जहाजों के लिए लगभग बंद हो गया है। US Central Command की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 38 जहाजों को रास्ता बदलने या वापस पोर्ट पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
- विदेश मंत्री Marco Rubio ने पहले भी कहा था कि ईरान द्वारा इस रास्ते पर टोल सिस्टम लागू करना दुनिया के लिए खतरनाक और अस्वीकार्य होगा।
- ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात की और अमेरिका व इसराइल के साथ चल रहे युद्ध पर चर्चा की।
- इस पूरे मामले में पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।