UAE में भारत के पूर्व राजदूत रहे Sunjay Sudhir ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर एक अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने ईरान पर हमले से पहले अपने NATO सहयोगी देशों से किसी भी तरह की बातचीत नहीं की थी। इस कदम से अब NATO देशों के बीच आपसी रिश्तों में कड़वाहट आने की आशंका जताई जा रही है। यह जानकारी खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर नजर रखने वालों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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अमेरिका और NATO के बीच क्यों पैदा हुआ तनाव?

पूर्व राजदूत के अनुसार अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला अकेले ही लिया। सामान्य तौर पर ऐसे बड़े हमलों से पहले गठबंधन के देशों को जानकारी दी जाती है और उनसे सलाह ली जाती है। लेकिन इस बार अमेरिका ने इसे पूरी तरह गोपनीय रखा और अपने साथियों से कोई चर्चा नहीं की। इसी वजह से संगठन के भीतर एक तरह का मतभेद पैदा हो गया है जिसे एक बड़ी दरार के रूप में देखा जा रहा है।

इस पूरे मामले से जुड़ी कुछ खास बातें

  • Sunjay Sudhir भारत के पूर्व राजदूत के तौर पर UAE में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों की अच्छी समझ है।
  • यह बयान ANI न्यूज़ द्वारा 5 अप्रैल 2026 की सुबह अपडेट किया गया है।
  • ईरान पर हुए हमले और अमेरिका के इस व्यवहार से NATO गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
  • खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए इस तरह की हलचल सुरक्षा के लिहाज से मायने रखती है।
  • NATO में अमेरिका के साथ कई ताकतवर देश शामिल हैं जो मिलकर वैश्विक फैसले लेते हैं।