अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 1 जून 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इस हमले के जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है। इस सैन्य टकराव के बीच कुवैत में भी हवाई हमले के अलर्ट जारी किए गए और पूरे देश में साइरन की आवाजें गूंज उठीं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच शांति के लिए बातचीत भी चल रही थी।

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अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर क्यों किए हमले?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि उन्होंने सप्ताहांत यानी 30 और 31 मई 2026 को ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर स्थित रडार और ड्रोन कमांड सेंटरों पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उनके MQ-1 ड्रोन को मार गिराए जाने के जवाब में आत्मरक्षा के तहत की गई थी। इस अमेरिकी हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा है।

दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार, 1 जून 2026 को दावा किया कि उन्होंने उस अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया है जिसका इस्तेमाल ईरान के सिरीक द्वीप पर एक टेलीकॉम टावर को निशाना बनाने के लिए किया गया था। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि वे वाशिंगटन पर भरोसा नहीं करते हैं और जरूरत पड़ने पर दोबारा जंग के मैदान में उतरने को तैयार हैं।

कुवैत में अलर्ट और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इस सैन्य टकराव के बीच कुवैत की सेना और सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने देश की हवाई सीमा में घुसने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया है। सोमवार को पूरे कुवैत में सुरक्षा कारणों से साइरन की आवाजें सुनाई दीं, जिससे लोग सतर्क हो गए। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और प्रवासियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि यह पूरा क्षेत्र इस संघर्ष की चपेट में आता दिख रहा है।

शांति समझौते को लेकर नेताओं के बयान और हालिया घटनाक्रम

तनाव के इस माहौल के बीच दोनों पक्षों की तरफ से बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 जून 2026 को कहा कि ईरान वास्तव में एक समझौता करना चाहता है जो दोनों पक्षों के लिए अच्छा रहेगा। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 31 मई को चेतावनी दी थी कि अगर कोई शांति समझौता नहीं होता है तो अमेरिकी सेना फिर से हमले करने के लिए तैयार है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ संदेशों का आदान-प्रदान चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। इसके अलावा, 29 मई को अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक मालवाहक जहाज ‘एमवी लियान स्टार’ को भी निशाना बनाया था क्योंकि उसने अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन किया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला क्यों किया?

अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में उनके एक MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों पर हवाई हमले किए।

कुवैत में साइरन क्यों बजाए गए?

1 जून 2026 को कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी हवाई सीमा में आ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया, जिसके चलते सुरक्षा अलर्ट के रूप में देश भर में साइरन बजाए गए।