अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद एक बड़ा अपडेट आया है. दोनों देशों के बीच विवाद खत्म करने के लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार किया गया है. करीब 18 घंटे चली इस गहन बातचीत के बाद मुख्य वार्ताकार तेहरान लौट चुके हैं, जबकि तकनीकी टीम अभी भी वहां मौजूद है.
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से बनी बात
यह पूरी बातचीत पाकिस्तान और कतर की मदद से संभव हो पाई. दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि अमेरिका और ईरान अब अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुँचने की कोशिश करेंगे. इस दौरान तकनीकी टीम स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में रहकर बाकी बचे मुद्दों को सुलझाएगी.
सुरक्षा और व्यापार के लिए नए इंतज़ाम
बातचीत में कुछ अहम समझौतों पर मुहर लगी है जिससे क्षेत्र में शांति आने की उम्मीद है:
- Strait of Hormuz: जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक कम्युनिकेशन लाइन बनाई गई है ताकि कोई गलतफहमी न हो और व्यापारिक जहाज बिना किसी डर के निकल सकें.
- लेबनान मामला: लेबनान में सैन्य ऑपरेशन्स को रोकने के लिए अमेरिका, ईरान और लेबनान के बीच एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाया जाएगा.
- तेल प्रतिबंधों में छूट: अमेरिका ने 60 दिनों के लिए ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल्स के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के ड्राफ्ट पर सहमति जताई है. इससे ईरान के सेंट्रल बैंक को तेल बेचकर भुगतान पाने में मदद मिलेगी.
परमाणु कार्यक्रम और तनाव
परमाणु मुद्दे पर अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम के स्टॉक को कम करे और उसकी निगरानी की जाए. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ़ किया है कि तेहरान यूरेनियम समृद्ध करने के अपने अधिकार से समझौता नहीं करेगा. बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों के कारण माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया था, जिस पर ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर गालिबफ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
अधिकारियों के बयान
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इन बातचीत की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे मिडिल ईस्ट के रिश्तों में स्थायी बदलाव आएगा. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से लेबनान युद्ध को खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है.
