अमेरिका और ईरान के बीच जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों के बावजूद दोनों देशों के बीच एक राजनयिक समझौता होना अभी भी मुमकिन है। भारत के आधिकारिक दौरे पर आए रुबियो ने बताया कि इस समय कतर में दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि इसमें कुछ सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएगा।
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कतर में चल रही है गुप्त बातचीत और ट्रंप का कड़ा रुख
दोनों देशों के बीच चल रही इस बातचीत का मुख्य केंद्र फिलहाल कतर बना हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ किया कि इस समय कतर में जो चर्चा हो रही है, उसका मुख्य उद्देश्य शुरुआती दस्तावेजों के शब्दों को सही तरीके से तय करना है। यह बातचीत आने वाले कुछ दिनों तक और चलने की उम्मीद है। अमेरिकी सरकार इस बातचीत को लेकर काफी गंभीर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह या तो एक अच्छा समझौता करेंगे या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे।
CENTCOM ने दी जानकारी, आत्मरक्षा में किए गए थे हमले
हाल ही में हुए हमलों को लेकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिकी हमले केवल आत्मरक्षा में किए गए थे ताकि अमेरिकी सैनिकों को ईरानी ताकतों के खतरे से सुरक्षित रखा जा सके। यह सुरक्षात्मक हमले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास किए गए थे, जिसमें मिसाइल साइटों और माइन बिछाने वाली संदिग्ध नावों को निशाना बनाया गया था। सेना ने साफ किया है कि वे युद्ध क्षेत्र में शांति बनाए रखने और संयम बरतने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन सैनिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति में बातचीत बंद हो गई है?
नहीं, दोनों देशों के बीच कतर में अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया है कि समझौते के दरवाजे अभी भी पूरी तरह खुले हैं।
अमेरिका ने ईरान पर हमले क्यों किए थे?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में किए गए थे।