अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। ईरान के उपाध्यक्ष मोहम्मद रज़ा आरिफ ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश अपने कानूनी अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह तनाव उस समय बढ़ रहा है जब दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गहरी असहमति बनी हुई है।

ℹ️: Kuwait Labour Update: कुवैत में मजदूरों की भीड़ पर प्रशासन सख्त, कंपनी की फाइलें बंद और मालिक CID के हवाले

अमेरिका और ईरान की बातचीत क्यों नहीं हो पाई

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने जानकारी दी कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत इसलिए विफल रही क्योंकि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया। ईरान की मांग थी कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना अधिकार मिले और युद्ध से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल केवल तनाव कम करने वाले तंत्र और कैदियों की रिहाई जैसे सीमित मुद्दों पर बात करना चाहता था।

ईरान के उपाध्यक्ष और सरकार का रुख

उपाध्यक्ष मोहम्मद रज़ा आरिफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिका ‘इजराइल फर्स्ट’ की नीति अपनाता है, तो समझौता होना नामुमकिन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर मुआवजे की मांग तक अपने सभी अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने भी पुष्टि की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी।

विवाद की टाइमलाइन और मुख्य घटनाक्रम

यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध से जुड़ा है। हाल ही में एक दो हफ्ते का युद्धविराम लागू था, जिसके दौरान इस्लामाबाद में शांति वार्ता का प्रयास किया गया था।

तारीख मुख्य घटना
7 अप्रैल 2026 ईरान ने सभी संभावित स्थितियों के लिए तैयारी की बात कही
11 अप्रैल 2026 उपाध्यक्ष आरिफ ने अमेरिका की इजराइल समर्थक नीति पर सवाल उठाए
12 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई
13 अप्रैल 2026 ईरान ने अपने कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के बचाव का ऐलान किया