अमेरिका और ईरान के बीच शांति की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। इस खबर के आते ही ग्लोबल मार्केट में खलबली मच गई है और कच्चे तेल (Oil) की कीमतें 7% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।

बातचीत क्यों फेल हुई और अब क्या होगा?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं। इस तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर देगी।

मुख्य विवाद के मुद्दे और एक्सपर्ट की राय

दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य वजहें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम का काम।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित खोलना।
  • ईरान की जमी हुई 27 अरब डॉलर की संपत्ति वापस करना।
  • युद्ध के नुकसान की भरपाई की मांग।

राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. तारिक फहमी ने कहा कि हालांकि बैठक फेल हो गई है, लेकिन बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले दस दिन मुश्किल हो सकते हैं और छोटे सैन्य हमले भी हो सकते हैं।

आम लोगों और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह की बढ़ोत्तरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि इससे ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान ने, जिसने इस बातचीत की मेजबानी की थी, दोनों देशों से अपील की है कि वे युद्ध से बचें और शांति बनाए रखें।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.