अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो ईरान पर फिर से हमला हो सकता है। इस तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है जिससे आम लोगों की जेब पर असर होगा।
क्या ईरान पर फिर से हमला हो सकता है?
विदेश मामलों के एक्सपर्ट Robinder Sachdev ने चेतावनी दी है कि बातचीत में तरक्की न होने पर अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। उनके अनुसार, अमेरिका अब देरी से परेशान हो सकता है और इसराइल के प्रधानमंत्री Netanyahu जैसे नेता हमले के लिए दबाव बना सकते हैं। Sachdev ने बताया कि पाकिस्तान में हुई बातचीत का टूटना सभी देशों के लिए बुरा रहा और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट आ सकती है।
ईरान की ‘स्विंग डिप्लोमेसी’ और नए खतरे
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। इस दौरे का मकसद अपने पार्टनर्स के साथ तालमेल बिठाना और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करना था। इसके साथ ही कुछ अहम बातें सामने आई हैं:
- ईरान ने Strait of Hormuz को एक ‘सुपर वेपन’ की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया है।
- वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों से अब ‘सिक्योरिटी और इंश्योरेंस चार्ज’ के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है।
- ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को परमाणु मुद्दों और Strait of Hormuz पर अपनी ‘रेड लाइन्स’ बता दी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है ताजा विवाद?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को एक उचित डील का ऑफर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर डील नहीं मानी गई तो ईरान के सभी पावर प्लांट और पुल तबाह कर दिए जाएंगे। वहीं, ईरान के सांसद Ebrahim Rezaei ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि पाकिस्तान अमेरिका के हितों का साथ दे रहा है। फिलहाल, ईरान ने वॉशिंगटन को एक नया प्रस्ताव भेजा है ताकि Strait of Hormuz को फिर से खोला जा सके और आपसी दुश्मनी खत्म हो।